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पूजा-पाठ करते समय ध्यान रखने योग्य ज़रूरी बातें, नहीं तो हो सकता है उल्टा असर

पूजा-पाठ सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं होती, बल्कि यह मन, घर और जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने का तरीका भी है। मैंने अपने अनुभव और बुज़ुर्गों से यही सीखा है कि अगर पूजा सही विधि और सही भाव से की जाए, तो उसका असर धीरे-धीरे पूरे जीवन पर दिखने लगता है। कई लोग नियमित पूजा करते हैं, फिर भी मन अशांत रहता है या कामों में रुकावट बनी रहती है। अक्सर इसकी वजह पूजा के समय होने वाली छोटी-छोटी गलतियाँ होती हैं, जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते।

1. पूजा करते समय मन का भटकना

सबसे बड़ी गलती यही होती है कि शरीर तो पूजा में बैठा होता है, लेकिन मन कहीं और भटक रहा होता है। पूजा का असली फल तभी मिलता है जब मन, वचन और कर्म तीनों एक साथ हों। अगर मन अशांत है, तो पहले कुछ पल शांति से बैठकर खुद को स्थिर करें, फिर पूजा शुरू करें।

2. गंदे या अस्त-व्यस्त पूजा स्थान पर पूजा करना

पूजा का स्थान घर का सबसे पवित्र कोना माना जाता है। अगर वहीं धूल, जाले, पुराने फूल या बेवजह की चीज़ें रखी हों, तो सकारात्मक ऊर्जा कमजोर हो जाती है। मैंने देखा है कि जैसे ही लोग पूजा स्थान को साफ और व्यवस्थित रखते हैं, पूजा में अपने-आप एक अलग शांति महसूस होने लगती है।

3. अधूरे या टूटे हुए पूजा सामान का उपयोग

टूटी माला, फटी आसन चटाई या जली-बुझी बत्ती के सहारे पूजा करना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। यह अव्यवस्था और अधूरेपन का संकेत होता है। पूजा में इस्तेमाल होने वाला हर सामान साफ, पूर्ण और सम्मानजनक होना चाहिए।

4. जल्दबाज़ी में पूजा निपटाना

बहुत से लोग पूजा को सिर्फ एक औपचारिकता की तरह जल्दी-जल्दी निपटा देते हैं। पूजा कोई बोझ नहीं है, बल्कि मन को हल्का करने का समय है। अगर समय कम हो, तो पूजा छोटी करें, लेकिन पूरे भाव और ध्यान के साथ करें।

5. पूजा के समय गलत दिशा में बैठना

पूजा करते समय दिशा का भी महत्व होता है। अक्सर लोग किसी भी तरफ मुँह करके बैठ जाते हैं। कोशिश करें कि पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख हो। इससे एकाग्रता बढ़ती है और मन जल्दी शांत होता है।

6. अशुद्ध अवस्था में पूजा करना

बिना हाथ-मुँह धोए, बहुत गुस्से या नकारात्मक भाव में पूजा करने से उसका पूरा फल नहीं मिल पाता। पूजा से पहले खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध करना ज़रूरी है। यह छोटा सा नियम पूजा की गुणवत्ता बदल देता है।

7. पूजा के दौरान मोबाइल या बातचीत में उलझना

आजकल यह बहुत आम हो गया है कि पूजा करते समय मोबाइल देख लिया जाए या बीच-बीच में बात करने लगें। इससे पूजा की ऊर्जा टूट जाती है। पूजा का समय सिर्फ प्रभु और अपने मन के लिए रखें।

8. पूजा के बाद तुरंत नकारात्मक चर्चा शुरू कर देना

कई लोग पूजा खत्म करते ही शिकायतें, बहस या तनाव भरी बातें शुरू कर देते हैं। इससे पूजा से बनी सकारात्मक ऊर्जा तुरंत कमजोर पड़ जाती है। पूजा के बाद कुछ समय तक शांत और सकारात्मक रहने की कोशिश करें।

9. नियमितता का अभाव

कभी बहुत ज़्यादा पूजा, कभी बिल्कुल नहीं यह असंतुलन भी नुकसान करता है। पूजा में निरंतरता सबसे ज़रूरी है। रोज़ थोड़ी पूजा भी पूरे मन से की जाए, तो उसका असर लंबे समय तक बना रहता है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य वास्तु मान्यताओं और जीवन के अनुभवों पर आधारित है। हर व्यक्ति की आस्था और परिस्थिति अलग होती है। इन बातों को अंधविश्वास की तरह नहीं, बल्कि मार्गदर्शन के रूप में अपनाएँ और अपने विवेक के अनुसार जीवन में संतुलन बनाएँ।

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