Find 3 differences: इस तस्वीर को देखते ही दिमाग अपने आप कहता है अरे यह तो बिल्कुल आसान है। सामने बैठे प्यारे से डॉग की दोनों तस्वीरें लगभग एक जैसी नजर आती हैं। नीला आसमान हरी घास और पीले फूल सब कुछ सेम सा लगता है। लेकिन यही सबसे बड़ा धोखा है। जैसे जैसे आप ध्यान से देखने लगते हैं वैसे वैसे दिमाग पर दबाव बढ़ने लगता है।
पहली नजर में मासूम दिखने वाली तस्वीर क्यों करती है कन्फ्यूज
इस तरह की तस्वीरों की सबसे खास बात यही होती है कि ये दिमाग को ओवर कॉन्फिडेंट बना देती हैं। आंखें कहती हैं कुछ भी अलग नहीं है लेकिन दिमाग मानने को तैयार नहीं होता। डॉग की बॉडी लैंग्वेज चेहरे के भाव और आसपास का माहौल बिल्कुल एक जैसा लगता है। यही वजह है कि लोग जल्दबाजी में अंतर ढूंढने लगते हैं और गलती कर बैठते हैं।
तस्वीर में दिख रहा हर छोटा डिटेल है जरूरी
अगर आप इस तस्वीर को ध्यान से देखें तो डॉग की पूंछ की शेप अलग नजर आएगी। कहीं हल्का सा मोड़ बदला हुआ है तो कहीं उसकी दिशा में फर्क दिखता है। फूलों को गौर से देखें तो दोनों तस्वीरों में उनकी संख्या और पोजीशन एक जैसी नहीं है। इसके अलावा डॉग के चेहरे से जुड़ा एक छोटा सा डिटेल भी बदला गया है जिसे पकड़ना सबसे मुश्किल है।

एक जैसी दिखने वाली 2 तस्वीरों के बीच छुपा है दिमागी खेल
यही वह जगह है जहां ज्यादातर लोग चूक जाते हैं। आंखें एक ही पॉइंट पर अटक जाती हैं और बाकी हिस्सों को नजरअंदाज कर देती हैं। जो लोग धैर्य के साथ पूरी तस्वीर को ऊपर से नीचे तक स्कैन करते हैं वही इस चैलेंज को पूरा कर पाते हैं। यही वजह है कि कहा जाता है कि यह तस्वीर तेज नजर वालों के लिए बनी है।
क्यों 99 प्रतिशत लोग पूरा नहीं कर पाते यह चैलेंज
जल्दबाजी और ज्यादा कॉन्फिडेंस इस चैलेंज की सबसे बड़ी दुश्मन है। लोग सोचते हैं कि दो अंतर तो मिल ही गए तीसरा भी मिल जाएगा। लेकिन तीसरा अंतर इतना छोटा होता है कि आंखें उसे बार बार मिस कर देती हैं। अगर आपने तीनों अंतर खोज लिए हैं तो वाकई आपकी ऑब्जर्वेशन पावर कमाल की है।
ऐसी तस्वीरें दिमाग के लिए क्यों हैं फायदेमंद
इस तरह की विजुअल पहेलियां दिमाग को एक्टिव रखती हैं। ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ाती हैं और छोटी छोटी चीजों पर फोकस करना सिखाती हैं। यही कारण है कि बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी इस तरह की चुनौतियों को पसंद करते हैं।
Disclaimer: यह कंटेंट केवल मनोरंजन और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका मकसद किसी भी प्रकार का दावा या भ्रम फैलाना नहीं है।