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Chankya Niti: इन 7 तरीको से किसी का भी झूठ पकड़ना सीखो

Chanakya Niti जीवन को बहुत गहराई से देखने की दृष्टि देती है। मैंने अपने अनुभव में यह महसूस किया है कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो वह अपने व्यवहार से खुद को प्रकट कर देता है। आचार्य चाणक्य मानते थे कि सत्य स्थिर होता है लेकिन झूठ हमेशा असहज रहता है। अगर इंसान ध्यान से देखना और सुनना सीख ले तो झूठ अपने आप सामने आ जाता है।

1. बात करते समय नजरों का टिक न पाना

चाणक्य नीति के अनुसार झूठ बोलने वाला व्यक्ति सामने वाले की आंखों में लंबे समय तक नहीं देख पाता। उसकी नजरें बार बार इधर उधर घूमती रहती हैं। यह मन के भीतर चल रहे डर और असुरक्षा का संकेत होता है। सच बोलने वाला व्यक्ति शांत रहता है जबकि झूठ बोलने वाला भीतर ही भीतर पकड़े जाने के डर से जूझता रहता है।

2. सीधे सवाल से बचने की आदत

जब किसी व्यक्ति से सीधा सवाल किया जाता है और वह जवाब देने के बजाय बात घुमाने लगता है तो यह झूठ का बड़ा संकेत होता है। Chanakya Niti कहती है कि सत्य सरल होता है और उसे छिपाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। झूठ बोलने वाला अक्सर नए विषय छेड़कर या उलटी बातें करके खुद को सुरक्षित रखना चाहता है।

3. जरूरत से अधिक सफाई देना

आचार्य चाणक्य के अनुसार जहां आवश्यकता से अधिक सफाई दी जाए वहां संदेह होना स्वाभाविक है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति बार बार अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश करता है। वह चाहता है कि सामने वाला उस पर विश्वास कर ले। सत्य बोलने वाले को खुद को साबित करने की चिंता नहीं होती।

4. शरीर की भाषा में अस्थिरता

झूठ बोलते समय व्यक्ति का शरीर उसका साथ नहीं देता। कभी हाथ हिलते हैं कभी बैठने की मुद्रा बदलती रहती है। पसीना आना या आवाज का लड़खड़ाना भी संकेत हो सकता है। Chanakya Niti के अनुसार मन और शरीर का तालमेल टूटना झूठ की पहचान बन जाता है।

5. बातों में निरंतरता का न होना

जो व्यक्ति सच बोलता है उसकी बात एक जैसी रहती है। झूठ बोलने वाला समय के साथ अपनी ही बात भूलने लगता है। उसकी कहानी में बदलाव आने लगते हैं। कभी शब्द बदलते हैं कभी घटनाएं। यह भ्रम उसकी कमजोरी बन जाता है और वहीं से झूठ पकड़ में आने लगता है।

6. छोटी बात पर अचानक गुस्सा

चाणक्य नीति मानती है कि झूठा व्यक्ति भीतर से डरा हुआ होता है। जब उससे सवाल किए जाते हैं तो वह असहज हो जाता है। हल्की सी बात पर भी उसका गुस्सा बढ़ जाता है। यह गुस्सा असल में सच सामने आ जाने के डर का परिणाम होता है।

7. जवाब देने में समय मांगना

जब किसी से सीधा प्रश्न पूछा जाए और वह बार बार समय मांगे या जवाब टालता रहे तो यह संकेत हो सकता है कि वह मन में कहानी बना रहा है। सत्य को सोचने की जरूरत नहीं होती। झूठ को गढ़ने के लिए समय चाहिए और यही बात उसे उजागर कर देती है।

Disclaimer: यह लेख चाणक्य नीति के विचारों और जीवन के सामान्य अनुभवों पर आधारित है। हर व्यक्ति और हर परिस्थिति अलग हो सकती है। इन तरीको का उपयोग समझदारी और विवेक के साथ करें और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी स्थिति को अवश्य समझें।

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