अक्सर लोगों को नहाते समय अचानक पेशाब आने लगता है और कई लोग इसे शर्म या बीमारी से जोड़ लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ज़्यादातर मामलों में यह कोई रोग नहीं, बल्कि शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। जब इसे सही तरह से समझा जाए, तो यह बात बिल्कुल साफ़ हो जाती है।
नहाते समय पेशाब क्यों आने लगता है?
नहाते समय जब शरीर पर पानी गिरता है, खासकर ठंडा या गुनगुना पानी, तो दिमाग़ को एक खास संकेत मिलता है। पानी की आवाज़, उसका स्पर्श और तापमान मिलकर दिमाग़ को यह संदेश देते हैं कि शरीर अब आराम की स्थिति में है। इसी वजह से ब्लैडर की मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगती हैं और पेशाब का दबाव महसूस होता है।
क्या यह किसी बीमारी का लक्षण है?
नहीं, सामान्य तौर पर इसे बीमारी नहीं माना जाता। यह शरीर की नेचुरल रिफ्लेक्स क्रिया होती है। जब तक पेशाब में जलन, दर्द या बार-बार बिना कंट्रोल के पेशाब आने जैसी समस्या न हो, तब तक घबराने की ज़रूरत नहीं होती।
पानी और दिमाग़ का गहरा कनेक्शन
दिमाग़ और मूत्राशय के बीच सीधा तालमेल होता है। जैसे ही नहाते समय बहते पानी की आवाज़ आती है, दिमाग़ उसी तरह रिएक्ट करता है जैसे हाथ धोते समय या नल की आवाज़ सुनकर पेशाब आने पर करता है। यह एक तरह से कंडीशनिंग होती है, जिसे शरीर ने समय के साथ सीख लिया होता है।
क्यों कहा जाता है इसे अद्भुत संकेत?
इसे अद्भुत इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि यह दिखाता है कि शरीर और दिमाग़ कितनी बारीकी से एक-दूसरे से जुड़े हैं। बिना किसी दवा या बाहरी वजह के, सिर्फ़ पानी के संपर्क से शरीर अपनी ज़रूरत पहचान लेता है और प्रतिक्रिया देता है बार-बार ज़ोर से रोकना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे मूत्राशय पर दबाव पड़ सकता है। बेहतर यही है कि नहाने से पहले पेशाब कर ली जाए, ताकि नहाते समय असहज महसूस न हो।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर नहाते समय ही नहीं, बल्कि हर समय पेशाब पर कंट्रोल न रहे, जलन हो, दर्द हो या बहुत बार पेशाब आने लगे, तब डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है। ऐसे मामलों में यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य ज्ञान और शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर आधारित है। किसी भी असामान्य लक्षण या परेशानी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।